जनजातीय छात्रवासों और आश्रमों में छात्रों की सेहत के साथ खिलवाड़, जिले में हॉस्टलों का बुराहाल
अफसरों की अनदेखी के चलते भोजन और नाश्ते में मौसमी सब्जियों और फलों के नाम पर खानापूर्ति
सरकार की छवि धूमिल करने में कोई कसर नही छोड़ रहे जिले के भ्रष्ट अफसर और अधिकारी
गुना। सरकारें आती-जाती रहती हैं, मुख्यमंत्री बदलते रहते हैं, मगर एक चीजकभी नहीं बदलती सुशासन का दावा। मोहन यादव सरकार भी इसी दावे के साथ आई थी कि अब व्यवस्था सुधरेगी, भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और जनता को राहत मिलेगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, दावों और हकीकत के बीच की खाई और चौड़ी होती चली गई। आज स्थिति यह है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार कोई छुपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि एक खुला रहस्य बन चुका है, जिसे सब जानते हैं, सब सहते हैं और सरकार ‘कार्रवाई जारी है’ कहकर आगे बढ़ जाती है।
दरअसल ऐसा ही कुछ जिला मुख्यालय की संयुक्त बिल्डिंग में हो रहा है जहां लोकायुक्त ने रंगे हाथों अधिकारी-कर्मचारी को रिश्वत लेते तक पकड़ा है। यहां के भ्रष्ट अफसर और अधिकारी ऐसा तालमेल बैठाते हैं, किंतु उनका पहिया वेपटरी हो जाता है और फिर वे अपने आपको दूध का धुला बताने लगते हैं। जबकि उनकी कहानी में कितनी कालिख लगी हुई है ये किसी से छिपी हुई नही है। हालत ये है कि वे सरकार की छवि धूमिल करने में कोई कसर नही छोड़ रहे। आमजन की शिकायतों का निराकरण न होना और आरटीआई में जानकारी न देना भी एक रहस्य बन गया है। उक्त बिल्डिंग में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में नम्बर-1 पर गुना का जनजातीय विभाग चल रहा है। डीओ ट्रायबल की उदासीनता के कारण खबरें निकलकर सामने आ रही हैं कि जनजातीय छात्रवासों और आश्रमों में पढऩे वाले गरीब बच्चों को मीनू अनुसार भोजन नही मिल रहा है। इसके चलते जनजातीय कार्य विभाग के हॉस्टलों में छात्रों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। अधिकतर हॉस्टलों में बच्चों की थाली से टमाटर, चुकंदर, खीरा, मूली का सलाद गायब है। बच्चों को जली रोटियों के बीच मिक्स सब्जी के नाम पर सिर्फ पत्ता गोभी और धुलधुल दाल परोसी जा रही है। यही नहीं कई जगह सुबह-शाम नाश्ते में सूखा पोहा दिया जा रहा है। भोजन और नाश्ते में मौसमी सब्जियों और फलों के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। यह खराब गुणवत्ता और कुप्रबंधन को दर्शाता है। ऐसा ही नजारा पूर्व में उमरी आश्रम पर देखा गया था, यहां गरीब बच्चे भूख के मारे सूखे परमल खाते देखे गए।
ऐसे होती है अधीक्षकों से अवैध वसूली और निर्माण में कमीशनखोरी
जनजातीय विभाग से लेकर चौक चौराहों पर चर्चा है कि ट्रायवल डिपार्टमेंट के प्राथमिक शिक्षक मंगलसिंह अधीक्षकों को बुलाकर अवैध वसूली और निर्माण एजेंसी के जिम्मेदारों को बुलाकर कमीशन लिया जाता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिले की जिन पंचायतों को राशि आवंटित करने के लिए डीओ के द्वारा लिस्ट भेजी जाती है उनसे पहले ही मंगलसिंह के द्वारा एड्वांस कमीशन बतौर राशि जमा करा ली जाती है। ऐसा ही एक नजारा हमारे संवाददाता ने अपने कैमरे में कैद किया है। जिसमें मंगलसिंह शिक्षक ड्यूटी टाइम में छात्रावास अधीक्षकों को एक चाय की गुमठी पर बुलाकर चर्चा करते दिख रहे हैं। हैरानी की बात तो यह कि जब एक प्राथमिक शिक्षक जो अपनी संस्था बालक सीनियर हॉस्टल उदयपुरी नही जाते और बी सिसोदिया डीओ ट्रायवल के संरक्षण में बैठे रहते हैं उसका वर्किंग डे में अधीक्षकों से मिलना आखिर क्या दर्शाता है।
इनका कहना है
हमारे पास में जो भी आवेदन आते हैं वो हम कलेक्टर और डीओ को भेजते हैं। कार्यवाही नही हो रही है तो कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत को भी बताओ। बांकी का मैं देखता हूं और बात करता हूं।
संजय खेडक़र, डीसी, जनजातीय विभाग ग्वालियर

