गुना में वर्दी पर ‘हवाला’ का दाग; रक्षक ही बने ‘भक्षक’, एसपी की भूमिका पर गंभीर सवाल!
थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मी डीआईजी के आदेश पर रात में ही हो चुके हैं सस्पेंड
(हेमराज जाटव)
गुना। लोकतंत्र के प्रहरी कहे जाने वाले पुलिस महकमे ने गुना में जिस ‘हवाला कांड’ को अंजाम दिया है, वह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का ‘संस्थागत चीरहरण’ है। धरनावदा थाने के 4 पुलिसकर्मियों का निलंबन तो केवल एक ‘सतही कार्रवाई’ है। असली प्रश्न उस ‘सत्ता और रसूख के शीर्ष’ पर खड़ा है, जिसके संरक्षण में यह करोड़ों का काला खेल खेला गया।
दरअसल हवालाकांड की खबर जैसे ही वायरल हुई तो पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया। रातों रात डीआईजी अमित सांघी ने जांच पड़ताल की तो 4 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं एसपी की संलिप्तता को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुना जिले में तलाशी में मिली नकद राशि के प्रकरण में पुलिस अधीक्षक की भूमिका को यथोचित न मानते हुए तत्काल प्रभाव से जिला पुलिस अधीक्षक, गुना अंकित सोनी को हटाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री श्री यादव ने यह जानकारी एक्स हैंडल पर देते हुए स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक शिथिलता, लापरवाही अथवा अनियमितता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
यह 1 करोड़ का कैश और 20 लाख का ‘सौदा’, न्याय का सरेआम कत्ल है
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने एक करोड़ रुपये की अवैध हवाला राशि पकड़ी, लेकिन उसे विधि सम्मत जब्त करने के बजाय 20 लाख में ‘सैटलमेंट’ कर दिया गया। यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता की मूल आत्मा और लोक सेवक की शपथ का खुला उल्लंघन है। डीआईजी अमित सांघी द्वारा आधी रात तक की गई पूछताछ ने इस ‘खाकी सिंडिकेट’ की चूलें हिला दी हैं।
बिना ‘शीर्ष’ की सहमति, संभव नहीं ऐसी दुस्साहिक डकैती
अब शहर में यह चर्चा का विषय है कि बिना पुलिस अधीक्षक की मौन सहमति या निर्देश के, अधीनस्थ कर्मचारियों में इतनी दुस्साहिक हिम्मत नहीं हो सकती कि वे करोड़ों की राशि का बंदरबांट कर सकें। जिले भर में एसपी की कार्यशैली गंभीर संदेह के घेरे में होने से जिले का मुखिया ही इस भ्रष्टाचार के ‘पिरामिड’ का आधार बन गया है? संवैधानिक सवाल ये था कि क्या प्रशासन केवल छोटी ‘मछलियों’ को बलि का बकरा बनाकर बड़े ‘मगरमच्छों’ को अभयदान देगा? किंतु इस बार मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से ऐसा नही हो पाया और अंत में उन्होंने एसपी को हटाने के निर्देश दिए। सवाल ये भी है कि यदि रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम जनमानस में विधि के शासन (रूल ऑफ लॉ) पर विश्वास कैसे टिकेगा? इसी को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने सिवनी हवाला कांड की तरह ही गुना हवाला कांड में कार्यवाही की है।
चार पुलिसकर्मियों पर पहले ही गिरी गाज
इससे पूर्व, शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी ने रूठियाई चौकी और धरनावदा थाने पहुंचकर मामले की गहन पड़ताल की थी। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। सस्पेंड होने वालों में धरनावदा थाना प्रभारी एसआई प्रभात कटारे, रूठियाई चौकी प्रभारी एएसआई साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन शामिल हैं। डीआईजी ने माना कि 19 मार्च को वाहन चेकिंग के दौरान विधिसम्मत कार्रवाई नहीं की गई और पुलिसकर्मियों का आचरण संदेहास्पद रहा।
क्या था मामला: 20 लाख की ‘डील’ और ‘रिफंड’ की चर्चा
यह पूरा घटनाक्रम नेशनल हाईवे-46 पर गुजरात पासिंग स्कॉर्पियों को रोकने से शुरू हुआ था। वाहन से करीब 1 करोड़ रुपये बरामद हुए थे, जिसे नियमानुसार जब्त करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर 20 लाख रुपये लेकर रफा-दफा कर दिया। चर्चा यह भी है कि गुजरात के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद यह राशि वापस (रिफंड) की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और उस व्यापारी की भी तलाश की जा रही है जिससे यह ‘सेटलमेंट’ किया गया था।

