दूसरे ही दिन शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर-एसपी को शपथ पत्र पेश कर शिकायत निरस्त करने सौंपा आवेदन
पूर्व सीएम की मदद से कांगे्रस पार्षद ने जिन आदिवासियों की जमीन को मुक्त कराया उन्हीं से लगवा दिए झूठे आरोप
गुना। शहर की हड्डीमिल क्षेत्र में स्थित आदिवासियों की वेशकीमती भूमि पर जिले के संभ्रांत कॉलोनाईजारों की निगाहें लम्बे अर्से से गढ़ी हुई हैं। वे आए दिन आदिवासियों को लोभ लालच में लेकर निर्दोष लोगों को द्वेष भावना से फंसाने का काम करते आ रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा उदाहरण विगत 21 मई 2026 को सामने आया जब कलेक्टर गुना के न्यायालय में उक्त भूमि की विक्रय परमीशन की तारीख पेशी थी। उसी दौरान कॉलोनाईजर के वकील ने आदिवासियों से तारीख पेशी कराने के बहाने आवेदन पर हस्ताक्षर करा लिए और बिना पढ़े सुने झूठी शिकायत पुलिस अधीक्षक के यहां कर दी जिसका न तो आदिवासियों को पता चल पाया और न ही पार्षद व उनके भाई को। इस बात की सच्चाई जब दूसरे ही दिन सामने आई तो शिकायतकर्ता आदिवासियों ने उक्त शिकायती आवेदन को फर्जी बताकर निरस्त कराने की मांग को लेकर कलेक्टर-एसपी के समक्ष शपथ पत्र पेश किया है।
दरअसल पूरा मामला ये है कि जगनपुर चक तहसील गुना में कृषि भूमि सर्वे क्रमांक 13, रकवा 2.487 स्थित है। जिसमें तोरणसिंह सहरिया पुत्र स्व. बालमुकंद निवासी खडक़पुर तहसील बमोरी, मेवा बाई पत्नी बैजनाथ निवासी चीम तहसील बमोरी, सरस्वती बाई पत्नी रमेश निवासी मंगवार तहसील गुना, भगवती बाई पत्नी पहलवान निवासी डांग देहरी, लखन पुत्र जवहार सहेरिया निवासी ग्राम जगनपुर चक तहसील गुना जिला गुना का हिस्सा है। खास बात ये है कि उक्त जमीन पर एक तरफ वर्षों से गब्बू पारदी का कब्जा था तो वहीं दूसरी ओर कॉलोनाईजरों ने जमीन मालिक आदिवासियों ने फर्जी अनुबंध करा लिए। जिसको लेकर कई शिकवा-शिकायत हुईं और कुछ बचाव करने वाले निर्दोष लोगों को फंसाया गया। इसके बावजूद भी स्थानीय पार्षद रामवीर जाटव वार्ड नम्बर 21 और उनके छोटे भाई रविन्द्र जाटव मैदान में डटे रहे और पारदियों से सामना किया। इस बीच उन्होंने पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह से सम्पर्क किया। पार्षद ने पूर्व सीएम श्रीसिंह की मदद से उक्त जमीन को अवैध कब्जाधारियों तथा कॉलोनाईजरों से मुक्त कराया। इतना ही नही पार्षद रामवीर ने आदिवासियों की जमीन को मुक्त कराने के साथ ही प्रशासन से सीमांकन भी करा दिया। अब वहीं लोग पार्षद और उनके भाई के खिलाफ आए दिन झूठा षडय़ंत्र रच रहे हैं जिससे वह किसी तरह गरीब आदिवासियों की वेशकीमती जमीन हथिया लें। जिसमें वह सफल नही हो पाते तो कॉलोनाईजर पार्षद की छवि धूमिल करने की नीयत से फर्जी शिकवा-शिकायत करवा देते हैं।
पेशी करवाने के बहाने वकील ने करवा दी झूठी शिकायत
दोपहर 12 से 1 बजे की बात है जब वह सभी लोग भूमि विक्रय परमीशन की तारीख पेशी करने नेहरू पार्क हनुमान चौराहे पर बैठकर अपने वकील का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक दूसरे वकील आए और कहने लगे कि तुम्हारे वकील किसी काम से कहीं चले गए। मैं तुम्हारी तारीख करा दूंगा तुम मेरे साथ चलो। यह बात कहकर वकील साहब पीजी कॉलेज के पार्क पर कुछ कागजों पर दस्ताखत करा लिए और उन्हें पढक़र नही सुनाया। इसके बाद एसपी ऑफिस के बाहर बिठा दिया। उक्त वकील साहब के साथ बलवीर सहरिया भी एसपी आफिस के कमरे में चले गए। वापस लौटकर कहा कि आप सभी अपने घर चले जाओ यह आवेदन कलेक्टर साहब के पास पहुंच जाएगा। वकील साहब की बातों में आकर हम घर चले गए इसके बाद सुबह पता चला कि एक प्रतिष्ठित अखबार में हमारी शिकायत की खबर छपी है। जिस पर उन्होंने शपथ पत्र पेश करते हुए उक्त शिकायती आवेदन को निरस्त करने की गुहार लगाई है। साथ ही झूठी शिकायत करवाने वाले कॉलोनाईजर अखलेश जैन तथा अन्य दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही की मांग की है।

