आंखों देखा हाल: पुलिस के कागजों और अभियानों के दावों से अलग दिखी धरातल की तस्वीर
धरनावदा में रूहिल शर्मा के पदस्थ होते ही शुरू हुआ जुआ-सट्टा का खेल, तत्कालीन प्रभारी प्रभात कटारे की मेहनत पर फिरा पानी
क्या पुलिस की मिली भगत से संचालित हो रहे जुआ-सट्टा के अवैध फड़?
गुना। धरनावदा थाना सहित जिलेभर के थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा समय-समय पर जुआ और सट्टा विरोधी अभियान चलाने तथा कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके उलट उस कार्यवाही और अभियानों का असर धरनावदा क्षेत्र में बिल्कुल दिखाई नही दिया। धरातल पर यहां की वास्तविक तस्वीर पुलिस प्रशासन के दावों के विपरीत देखी गई। यह क्षेत्र राजस्थान की सीमा से जुड़ा है और पारदी बाहुल्य होने के साथ-साथ विकास की दृष्टि से भी काफी पिछड़ा माना जाता है। इसलिए यह बात सही भी है कि इस तरह की गतिविधियों को नकारा नही जा सकता है। पूर्व में जो कार्यवाही हुई हैं और दावे किए गए हैं उस हिसाब से वर्तमान थाना प्रभारी के कार्यकाल में इस तरह की गतिविधियां चलना पुलिस को शर्मिंदा करती हैं। वह भी जब तब शासन ने राजस्थान से आने वाले नशीले मादक पदार्थों तथा अपराधों को रोकने के लिए धरनावदा जैसे गांव में थाना बना दिया गया हो। इसके बावजूद भी क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बात तो दूर है, परंतु पुलिस के होते हुए जुआ और सट्टे का कारोबार जारी है।
दरअसल हम आंखों देखी बात करें तो धरनावदा थाना क्षेत्र के कुछ स्थानों पर खुलेआम जुआ और सट्टे की गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिससे युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और सामाजिक वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। बड़ा सवाल ये है कि थाने के इर्द-गिर्द इस तरह की अवैध गतिविधियां पाई जाना क्या पुलिस नेटवर्क से बाहर हैं या फिर यूं कहें कि यह सब खेल थाना प्रभारी रूहित शर्मा के संरक्षण में चल रहा हैं। दूसरी मजे की बात ये है कि यहां के जनप्रतिनिधियों और गांव के जागरूक लोगों को इस बात की भनक नही है ऐसा हो नही सकता। हकीकत तो ये है कि पुलिस मौन पड़ी हुई है और स्थानीय आमजनों के अलावा वहां के जनप्रतिनिधि तथा जागरूक नागरिक किसी से बुराई या मौल लड़ाई नही लेना चाहते। कहते हैं कि आ बैल मोए मार वाली कहावत से दुनिया डरी हुई है जो जिसे जैसा करना है वह करे सब स्वतंत्र हैं। यह कहना गलत नही होगा कि पुलिस अगर ईमानदार है तो वह पूरी ईमानदारी से अपनी देशभक्ति निभाएगी यह सो टंच बात है कोई परिंदा भी पर नही मार सकता। फिलहाल ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्व की पुलिस कार्यशैली और दावों के मुताबिक तत्कालीन थाना प्रभारी प्रभात कटारे की मेहनत पर पानी फिरता नजा आ रहा है।
पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष कार्यवाही की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कागजों में अभियान और कार्रवाई दिखाई देती है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग नजर आती है। नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि यदि ऐसे अवैध कारोबार वास्तव में संचालित हो रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही, नियमित निगरानी बढ़ाकर कानून व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर धरातल पर भी दिखाई दे। सूत्रों का कहना है कि राजस्थान से गांजे की तस्करी सहित डोडाचूरा, अफीम और चरस जैसे नशीले मादक पदार्थ खपाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर धरनावदा में जुआ सट्टा जैसे अवैध फड़ों से गांव का माहौल बिगड़ रहा है। और यहां की युवा पीढ़ी तथा बच्चे इस घातक लत में जकड़े हुए हैं।
पुलिस से बेखौफ चल रहे जुआ-सट्टा के फड़
पहली बार किसी काम से निकले मीडिया कर्मी धरनावदा थाना क्षेत्र में पहुंचे। इस दौरान उन्हें सरेआम जुआ खेलते और सट्टा पर्ची काटते लोग मिले। नजारा ऐसा था कि लोग बिंदास अपने काम को पुलिस से बेखौफ होकर अंजाम तक पहुंचाते रहे। वाकायदा डायरी में सट्टे के नम्बर नोट करता युवक तो दूसरा पर्ची से नम्बर नोट कराता रहा। उधर पास में ही जुआ फड़ पर मजमा लगा रहा। इससे गांव ही नही अपितु पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है।
थाना प्रभारी ने नही उठाया फोन
क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से अवगत कराने मीडियाकर्मियों ने धरनावदा थाना प्रभारी रूहिल शर्मा को फोन लगाया तो उन्होंने फोन उठाना उचित नही समझा। क्षेत्र की अवैध गतिविधियों को देख उनसे राह नही गया तो वे धरनावदा थाना भी पहुंचे। यहां से भी कोई हल नहीं निकला तो मीडियाकर्मी रूठियाई चौकी पर पहुंचे जहां से धरनावदा थाना चलता है। यहां भी थाना प्रभारी को कई फोन किए, लेकिन अभी तक कोई उत्तर नहीं मिला। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब मीडिया कर्मियों के कई फोन पहुंचने के बावजूद भी कि कॉल रिसीव नही हुआ तो फिर आमजन की क्या स्थिति होगी।

