डिजिटल फ्रॉड में ऐसे होता था खेल, शातिर रिफंड भी लेते और महंगा मोबाइल भी रख लेते थे!
फर्जी नाम, सिम और अमेजन अकाउंट बनाकर करते थे ठगी, 37 लाख का मशरूका बरामद, करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने की आशंका
गुना। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन की रिफंड प्रक्रिया का कथित रूप से दुरुपयोग कर महंगे मोबाइल फोन हड़पने वाले गिरोह का कैंट थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी शेखर मीना और उसके सहयोगी तरुण शर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 35 लाख रुपए कीमत की ईवी कार और 2 लाख रुपए कीमत के दो मोबाइल फोन, कुल करीब 37 लाख रुपए का मशरूका बरामद किया गया है। पुलिस को इस नेटवर्क के जरिए आरोपियों द्वारा करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित किए जाने की भी आशंका है।
पुलिस के अनुसार मामले का खुलासा 31 अगस्त 2026 को कैंट थाने में दर्ज शिकायत से हुआ। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि शेखर मीना ने अमेजन एप पर करीब 65 हजार रुपए कीमत का वनप्लस मोबाइल 45 हजार रुपए में देने का लालच देकर उससे 12 हजार रुपए एडवांस ले लिए, लेकिन न तो मोबाइल दिया और न ही रकम वापस की।
शिकायत की जांच के दौरान पुलिस ने शेखर मीना से पूछताछ की तो ऑनलाइन शॉपिंग में चल रहे कथित ‘रिफंड खेल’ का खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी नाम और अलग-अलग मोबाइल नंबरों से अमेजन पर कई अकाउंट बनाता था। इन अकाउंट से महंगे मोबाइल प्री-पेड भुगतान कर ऑर्डर किए जाते थे।
ऐसे चलता था रिफंड का खेल
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मोबाइल की डिलीवरी पहुंचने पर आरोपी डिलीवरी कर्मचारी को घर पर मौजूद नहीं होने की बात कहकर पार्सल की डिलीवरी होल्ड करवा देता था। इसके बाद कथित रूप से अमेजन की रिफंड प्रक्रिया का अनुचित लाभ उठाकर ऑर्डर की पूरी रकम बैंक खाते में रिफंड करा लेता था। इसके बाद कूरियर कर्मचारियों से संपर्क कर वही मोबाइल पार्सल भी हासिल कर लेता था।
यानी आरोपी एक ही मोबाइल पर पूरी रकम वापस भी लेता था और मोबाइल भी अपने पास रख लेता था। बाद में इन मोबाइलों को परिचित मोबाइल दुकानदारों और अन्य लोगों को कम कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाने की बात भी सामने आई है।
अकाउंट ब्लॉक हुआ तो नए नाम से बना लेते थे नया अकाउंट
जांच में यह भी सामने आया कि संदिग्ध गतिविधियों के चलते अमेजन अकाउंट ब्लॉक होने पर आरोपी नए फर्जी नाम और मोबाइल नंबर से नया अकाउंट तैयार कर लेता था। इसके लिए बड़ी संख्या में सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस के अनुसार एक टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारी द्वारा सिम उपलब्ध कराने और ओटीपी के जरिए अमेजन अकाउंट बनाने में मदद किए जाने की जानकारी भी मिली है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
पुलिस को जांच के दौरान विभिन्न बैंक खातों के साथ परिवार के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के खातों के इस्तेमाल की जानकारी भी मिली है। पूछताछ में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित कुल 14 लोगों के खिलाफ कैंट थाने में अपराध क्रमांक 758/26 दर्ज किया है। प्रकरण में धारा 318(4), 319(2), 316(2), 61(2) बीएनएस एवं 66(C), 66(D) आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
दो आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस ने 2 सितंबर को मुख्य आरोपी शेखर पुत्र भगतराम मीना (35), निवासी ग्राम विलौदा, थाना बमौरी तथा तरुण शर्मा, निवासी साढ़ा कॉलोनी राघौगढ़ को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायालय से पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खाते, अमेजन अकाउंट, ऑनलाइन लेन-देन, कूरियर नेटवर्क और मोबाइलों की बिक्री से जुड़े लोगों के संबंध में पूछताछ कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अब तक इस तरीके से कितने मोबाइल हासिल किए गए और कितने रुपए की धोखाधड़ी की गई। पुलिस को आरोपियों द्वारा इस कथित धोखाधड़ी से करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित किए जाने की आशंका है। नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
इस पुलिस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अनूप कुमार भार्गव, उपनिरीक्षक अजय प्रताप सिंह, प्रधान आरक्षक भूपेंद्र शर्मा, प्रधान आरक्षक नरेंद्र रघुवंशी, आरक्षक नीलेश रघुवंशी, राजीव रघुवंशी, संजय जाट, महेंद्र वर्मा, धर्मेंद्र रघुवंशी एवं रवि जाट की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

