मावठ पडऩे से कुछ किसानों के खिले चेहरे तो मसरा और चना, चना वाले किसान कुछ हुए मायूस
बिजली की गडग़ड़ाहट से खुली गुना की नींद, आसमानी बिजली की गर्जना के साथ बरसे बदरा
बेमौसम बारिश से तरबतर हुई सडक़ें, कड़ाके की ठंड के साथ गिरा पारा
गुना। मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ जिला मुख्यालय सहित अंचल में पिछले तीन दिन से उमड़-गुमडक़र बदरा बरस रहे हैं। मावठ गिरने से एक ओर जहां गेंहू की फसल बोने वाले किसान खुश हैं तो वहीं दूसरी ओर जिन किसानों ने चना-धना और मसरा बोने वाले किसान मायूस हैं। चूकि बेमोसम बारिश से चना, धना और मसरा की फसल में काफी नुकसान हुआ है।
दरअसल मंगलवार की सुबह भी गुना शहर के निवासियों के लिए काफी शोर-भरी और गीली रही। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात से शुरू हुआ बादलों की गर्जना और बारिश का सिलसिला मंगलवार सुबह तक जारी रहा। आधी रात को अचानक कडक़ी बिजली की आवाज इतनी तेज थी कि गहरी नींद में सोए लोग भी घबराकर जाग गए। इस दौरान करीब आधे घंटे तक झमाझम बारिश हुई, जिसने शहर की रफ्तार रोक दी।
सुबह फिर बदला मिजाज, 6 एमएम बारिश दर्ज
रात की बारिश के बाद मंगलवार सुबह आसमान में घने काले बादल छाए रहे। सुबह करीब 9:30 बजे एक बार फिर मौसम ने करवट ली और कडक़ड़ाती बिजली के साथ तेज बारिश का दौर शुरू हुआ। लगभग 30-40 मिनट तक हुई इस मूसलाधार बारिश ने शहर की मुख्य सडक़ों और बस्तियों को जलमग्न कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में लगभग 6 मिलीमीटर (5.8 द्वद्व) बारिश दर्ज की गई है। बारिश के कारण न्यूनतम तापमान गिरकर 14.9 डिग्री पर आ गया, वहीं हवा में आर्द्रता का स्तर 93 फीसदी तक पहुँच गया, जिससे वातावरण में भारी नमी और ठंडक बढ़ गई है।
आखिर क्यों हो रही है यह बेमौसम बारिश?
फरवरी के महीने में हो रही इस अचानक बारिश के पीछे मुख्य कारण उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भूमध्य सागर से आने वाली नमी युक्त हवाओं के कारण उत्तर और मध्य भारत के वायुमंडल में बदलाव आया है। वहीं राजस्थान और उसके आसपास के हिस्सों में बने एक प्रेरित चक्रवाती घेरे की वजह से नमी का प्रवाह मध्य प्रदेश की ओर बढ़ा है। इसके अलावा अरब सागर से आने वाली नमी और उत्तर की ठंडी हवाओं के मिलन से गरज-चमक की स्थिति पैदा हुई है, जिसे थंडरस्टॉर्म एक्टिविटी कहा जाता है।
खेती पर असर पडऩे से किसान चिंतित
इस बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वर्तमान में धनिया, चने और सरसों की फसलें पकने की कगार पर हैं, ऐसे में तेज हवाओं और बिजली के साथ हुई बारिश से फसलों के आड़े गिरने और उनमें अफलन की समस्या पैदा हो सकती है। हालांकि, गेहूं की फसल के लिए हल्की बारिश को फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन यदि ओलावृष्टि होती है तो भारी नुकसान की आशंका है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों तक जिले में इसी तरह का मौसम बने रहने और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई है।

