सोनोग्राफी रिपोर्ट और सर्जरी की प्रक्रिया को लेकर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की गुहार
गुना। शहर के चौधरन कॉलोनी स्थित वर्धमान मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान एक मरीज की सर्जरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, संबंधित चिकित्सकों और सोनोग्राफी सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष मजिस्ट्रियल जांच कराने की मांग की है।
परिजनों के अनुसार मनीषा कोरी की उपचार और ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही अथवा उपचार में हुई किसी गंभीर त्रुटि के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई। खास बात ये है कि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में होने वाली गंभीर सर्जरी को एक अकेले डॉक्टर ने गुना के मल्टीस्पेशलिटी वर्धमान अस्पताल में कर दिया, जो विशेषज्ञ टीम की निगरानी में किया जाना था। क्रिटिकल ऑपरेशन के बाद मरीज को जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा जाता है। इससे स्पष्ट है कि अस्पताल में मौजूदा संसाधनों की स्थिति को भांपते हुए अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर ने आनन फानन में मनीषा को भोपाल रैफर कर दिया। ऐसी गंभीर सर्जरी के 4 घंटे बाद गुना अस्पताल से भोपाल लेकर पहुंचे जहां मनीषा कोरी को उसकी डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस संबंध में मनीषा के पति रानू उर्फ राजकुमार पंत ने बताया कि मेरी पत्नी को पहले से ऐसी कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। वह सामान्य रूप से स्वस्थ थी और केवल थोड़ी बीमारी के कारण उपचार के लिए 12 सितंबर 2026 को अस्पताल में भर्ती हुई थी। उपचार प्रक्रिया के दौरान भी परिजनों को गुमराह कर रखा, उनसे सिर्फ छोटा ऑपरेशन करने की बोला था कि लेजर प्रक्रिया से जल्द ही ऑपरेशन कर देंगे, लेकिन ओटी में करीब 4 घंटे लगे और कहां गया कि आंत फटी थी, आँतों में छेद थे और इंफेक्शन था। इस कारण मल द्वार भी साइड से बनाना पड़ा जो बेहद जटिल होता है।
ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने भी माना जांच रिपोर्ट में थी कमी
मनीषा निवासी बांसखेड़ा की जांच रिपोर्ट के आधार पर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन आरोप है कि चिकित्सक द्वारा लेप्रोस्कोपी के बजाय लेप्रोटोमी सर्जरी कर दी गई। परिजनों का दावा है कि अस्पताल की कुछ जांच रिपोर्टों को लेकर स्वयं चिकित्सक द्वारा भी आपत्ति स्वीकार किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।
फिलहाल ऑपरेशन फैल होने से मनीषा को हमने खो दिया। सोमवार दिनभर परेशानियों का सामना करने के बाद रातभर आई कठिनाइयों के चलते पत्रकार साथी रानू उर्फ राजकुमार पंत अपनी पत्नी मनीषा को वापस घर ले आए। परिजनों का आरोप है कि मरीज को आनन-फानन में भोपाल भेजने का निर्णय भी पूरे मामले में कई सवाल खड़े करता है।
सोनोग्राफी सेंटर और आयुष्मान की भूमिका की भी जांच की मांग
परिजनों ने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट और सर्जरी की प्रक्रिया में कोई विसंगति सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित सोनोग्राफी सेंटर सहित उपचार से जुड़े सभी स्तरों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने अस्पताल में किए गए उपचार, जांच रिपोर्ट, ऑपरेशन की प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और क्रिटिकल केयर स्टाफ सहित रेफरल से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है। इस मामले में एक और बात ये सामने आ रही है कि पेशेंट के पास आयुष्मान कार्ड था फिर भी उससे पैसे जमा कराए गए हैं। इसकी भी जांच जनहित में अति आवश्यक है।
कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों तक मामला पहुंचाने की अपील
परिजनों और मामले से जुड़े लोगों ने कलेक्टर सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और शासन स्तर तक शिकायत पहुंचाकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में लापरवाही या चिकित्सा संबंधी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में इस तरह के अन्य मामलों को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष रूप से जांच के बाद ही हो सकती है। उनका कहना है कि मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जांच करानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

